उत्तर : पर्यावरण के घटकों—वायु, जल, भूमि और ध्वनि—का हानिकारक रूप से दूषित हो जाना ही पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।
प्रश्न - 2. आजकल मौसम चक्र में क्या-क्या परिवर्तन पाए जाते हैं??
उत्तर : आजकल अतिवृष्टि, अल्पवृष्टि, अनावृष्टि, बाढ़, सूखा, अत्यधिक ठंड या गर्मी जैसे असामान्य परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
प्रश्न - 3. ध्वनि प्रदूषण से कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं?
उत्तर : ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और श्रवण शक्ति में कमी होती है।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. पृथ्वी पर जीवन किस प्रकार संभव हो सका?
उत्तर : पृथ्वी पर जीवन प्रकृति के विभिन्न तत्त्वों—वनस्पति, शाकाहारी और मांसाहारी जीवों—के आपसी संतुलन के कारण संभव हो सका।
प्रश्न - 2. प्रदूषण किस-किस प्रकार का माना जाता है?
उत्तर : प्रदूषण मुख्यतः चार प्रकार का होता है— 1. भूमि प्रदूषण
2. जल प्रदूषण
3. वायु प्रदूषण
4. ध्वनि प्रदूषण
प्रश्न - 3. मौसम-चक्र में पाई जाने वाली ‘प्राकृतिक विपदा’ का जिम्मेदार किसे माना जाता है?
उत्तर : मौसम-चक्र की प्राकृतिक विपदाओं के लिए मनुष्य को जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि उसने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. जल-प्रदूषण के कारण और दुष्प्रभाव को विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर : जल-प्रदूषण के मुख्य कारण हैं—नगरों की गंदगी, मल-जल, औद्योगिक कचरा, रासायनिक पदार्थ और कीटनाशक दवाओं का नदियों व जलाशयों में मिलना।
इसके दुष्प्रभावस्वरूप पीने योग्य जल की कमी हो जाती है, जलजनित रोग फैलते हैं, जलीय जीव नष्ट होते हैं और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
प्रश्न - 2. वायु-प्रदूषण के क्या कारण हैं? इसके दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डालिए।
उत्तर : वायु-प्रदूषण के कारण हैं—कल-कारखानों का धुआँ, वाहनों से निकलने वाली गैसें, रासायनिक पदार्थ, रॉकेट और अंतरिक्ष यान।
इसके दुष्प्रभावस्वरूप साँस के रोग, कैंसर, हृदय रोग, ओजोन परत का क्षय और मानसिक तनाव बढ़ता है।
प्रश्न - 3. प्रदूषण की रोकथाम के उपाय सुझाइए। किन संस्कारों को मानते हुए पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है?
उत्तर : प्रदूषण रोकने के उपाय हैं—
• अधिक-से-अधिक वृक्षारोपण
• गंदगी न फैलाना
• कूड़ा-कचरा उचित स्थान पर डालना
• नवीकरणीय ऊर्जा (सूर्य, जल, वायु) का प्रयोग
• जहरीले रसायनों का सीमित उपयोग
भारतीय संस्कृति में पेड़ लगाना पुण्य माना गया है, जल स्रोतों की पवित्रता बनाए रखना, पेड़ों को न काटना और स्वच्छता के संस्कार पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।