प्रश्न - 1. शरीर की निरोगता किस प्रकार प्राप्त की जानी चाहिए?
उत्तर : शरीर की निरोगता संयमित आहार-विहार और नियमित जीवनचर्या से प्राप्त की जानी चाहिए।
प्रश्न - 2. असंयम से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर : असंयम के प्रभाव से शरीर दुर्बल, रोगग्रस्त और अशक्त हो जाता है।
प्रश्न - 3. संयम शरीर पर क्या प्रभाव डालता है?
उत्तर : संयम के प्रभाव शरीर सशक्त, निरोग और दीर्घजीवी बनता है।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. कीमती चीजें कितनी पौष्टिक हो सकती हैं?
उत्तर : कीमती खाद्य पदार्थ आवश्यक नहीं कि अधिक पौष्टिक हों। स्वास्थ्य, संयम और नियमितता से बनता है, महँगे भोजन से नहीं।
प्रश्न - 2. 'फूलों की सेज' और 'मोहनभोग' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर : • फूलों की सेज – इतना श्रम कि कहीं भी गहरी नींद आ जाए।
• मोहनभोग – इतनी भूख कि साधारण भोजन भी स्वादिष्ट लगे।
प्रश्न - 3. मनुष्य समय से पहले मरने और गड़ने के लिए अपनी कब्र अपनी जीभ से खोदता है। कैसे?
उत्तर : चटोरेपन के कारण मनुष्य अनुपयुक्त और अधिक भोजन करता है, जिससे रोग और अकाल मृत्यु का खतरा बढ़ता है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. 'जब तक विकृतियाँ पल्ले बँधी रहेंगी, तब तक स्वास्थ्य समस्या के समाधान का कोई मार्ग नहीं मिल सकता।' यहाँ किन विकृतियों की बात की गई है तथा उनका क्या समाधान माना गया है?
उत्तर : यहाँ विकृतियों से तात्पर्य असंयम, वासना, लोभ, लिप्सा और गलत खान-पान की आदतों से है। ये विकृतियाँ शरीर और मन दोनों को रोगी बना देती हैं। इनका समाधान संयमित जीवन, नियंत्रित आहार-विहार और नियमित, सुसंयत दिनचर्या अपनाने में है।
प्रश्न - 2. चटोरा व्यक्ति किस प्रकार अपने स्वास्थ्य का शत्रु होता है? उपयुक्त दृष्टांत देकर समझाइए।
उत्तर : चटोरा व्यक्ति स्वाद के वशीभूत होकर आवश्यकता से अधिक और अनुपयुक्त भोजन करता है। इससे पाचन शक्ति कमजोर होती है और अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। हकीम लुकमान के अनुसार ऐसा व्यक्ति अपनी जीभ से ही अपने रोग और अकाल मृत्यु का कारण बनता है।
प्रश्न - 3. 'आरोग्य को कुंजी इन आदतों में सन्निहित है. जो आहार-विहार के चलन करने तथा अपनाने के लिए सरदायी है। कथन को पुष्टि कीजिए।
उत्तर : स्वास्थ्य दवाइयों या महँगे भोजन से नहीं, बल्कि सही आदतों से बनता है। संयमित आहार, नियमित व्यायाम, श्रम और संतुलित जीवनचर्या आरोग्य का आधार हैं। जो व्यक्ति इन आदतों को अपनाता है, वही दीर्घकाल तक निरोग और सशक्त रहता है।