प्रश्न 1 - श्रीकृष्ण गाय चराने क्यों जाना चाहते थे?
उत्तर : क्योंकि वे अपने मित्रों के साथ जंगल में जाकर खेलने, फल खाने और ग्वाल-बालों जैसा काम करने की इच्छा रखते थे।
प्रश्न 2 - श्रीकृष्ण गाय चराते समय किनके साथ रहने के लिए कहते हैं?
उत्तर : रैता, पैता, मना, मनसुखा और बलराम (हलधर) के साथ।
प्रश्न 3 - यशोदा को किस बात का भय है जिससे वे श्रीकृष्ण को गाय चराने नहीं जाने दे रही हैं?
उत्तर : उन्हें भय है कि कृष्ण बहुत छोटे हैं; धूप, थकान और जंगल के रास्ते से उनका कोमल शरीर और कमल-सा चेहरा कुम्हिला जाएगा।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1 - गाय चराने जाने पर यशोदा के मन में उठे संदेहों को श्रीकृष्ण क्या कहकर दूर करने का प्रयास करते हैं?
उत्तर : श्रीकृष्ण कहते हैं कि उन्हें न धूप लगेगी, न भूख सताएगी। वे यमुना-जल की सौगंध देकर कहते हैं कि वे साथियों के साथ सुरक्षित रहेंगे और माँ दही-भात भेज दे तो वे खा लेंगे।
प्रश्न 2- श्रीकृष्ण जल्दी से बड़ा क्यों हो जाना चाहते हैं?
उत्तर : क्योंकि वे चाहते थे कि वे सबमें सबल (ताकतवर) बनें, निर्भय होकर रहें और अपने शत्रुओं का सामना करने के योग्य हों।
प्रश्न 3- शक्तिशाली बनने के लिए श्रीकृष्ण क्या चाहते हैं?
उत्तर : वे चाहते हैं कि उन्हें स्वतंत्रता मिले, वे ग्वाल-बालों के साथ रहें, कठोर परिश्रम करें और मैदान में खेलते हुए स्वयं को मजबूत बनाएँ।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न 1 - श्रीकृष्ण के मन में किस पर विजय पाने की अभिलाषा थी और क्यों?
उत्तर : श्रीकृष्ण के मन में कंस पर विजय पाने की अभिलाषा थी। वे बचपन से ही अपने शत्रु कंस की अत्याचारपूर्ण गतिविधियों को जानते थे। कंस निरंतर देवकी-वसुदेव को कष्ट देता था और कृष्ण को मारने के लिए अनेक दानव भेजता था। कृष्ण बाल-स्वभाव में ही कहते हैं कि वे रंगभूमि में कंस को पछाड़ देंगे और शत्रुओं को नष्ट कर देंगे। उनकी यह इच्छा धर्म की रक्षा करने और मथुरा को अत्याचार से मुक्त कराने की भावना से प्रेरित थी।
प्रश्न 2 - निम्नलिखित पंक्तियों का भाव लिखिए- (अ) तनक-तनक पग चलि हौ कैसे; आवत है है रीति।
उत्तर : माँ यशोदा कृष्ण को मना करते हुए कहती हैं कि वे अभी बहुत छोटे हैं। उनके पैर भी बहुत नन्हें हैं। ऐसे छोटे-छोटे पैरों से वे जंगल की लंबी दूरी कैसे तय करेंगे? गाय चराने जाने की जो प्रथा है, वह बड़े बच्चों के लिए है, छोटे कृष्ण के लिए नहीं। इस पंक्ति में यशोदा की चिंता और मातृस्नेह प्रकट होता है।
प्रश्न - निम्नलिखित पंक्तियों का भाव लिखिए- (ब) “तुम्हरौ कमल बदन कुम्हिलैहै, रेंगत घामहि माँझ।”
उत्तर : यशोदा कहती हैं कि कृष्ण का चेहरा कमल-सा कोमल है। यदि वे धूप में चलते या थककर रेंगते हुए लौटेंगे तो उनकी कोमल कांति नष्ट हो जाएगी और चेहरा मुरझा जाएगा। धूप, थकान और मार्ग की कठिनाई देखकर यशोदा पुत्र को कष्ट में नहीं जाने देना चाहतीं। यहाँ मातृ-चिंता और प्रेम का मार्मिक चित्रण है।
प्रश्न - निम्नलिखित पंक्तियों का भाव लिखिए- (स) मैया मोहि बड़ो कीर लैरी। दूध-दही-घृत-माखन मेवा, जो माँगो सो देरी।
उत्तर : कृष्ण माँ से कहते हैं कि उन्होंने उन्हें बहुत बड़ा बना दिया है। वे उन्हें दूध, दही, घी, मक्खन और मेवा—जो कुछ भी माँगें, सब देती हैं। इसलिए उनमें यह विश्वास और साहस पैदा हो गया है कि वे बड़े काम कर सकते हैं। कृष्ण का यह कथन उनकी बाल-स्वाभाविक मिठास, आत्मविश्वास और माँ के प्रति कृतज्ञता से भरा है। इनमें उनके आगे बढ़ने की इच्छा और बलवान बनने की आकांक्षा प्रकट होती है।