उत्तर : रामप्रसाद देखने में भिखारियों जैसा लगता था। उसकी शक्ल-सूरत और पहनावा साधारण व मैले कपड़ों वाला था।
प्रश्न - 2. दस रुपये चुराकर आदित्य ने क्या किया?
उत्तर : दस रुपये चुराकर आदित्य ने ताला बंद कर दिया और चाबी बक्से के ताले में फँस गई, जिसे उसने कपड़े से ढक दिया।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. जिन लड़कों की संगति में आदित्य रहने लगा था, उनके जीवन का क्या लक्ष्य था?
उत्तर : उन लड़कों के जीवन का कोई लक्ष्य नहीं था। उनका उद्देश्य केवल पेट भरकर जीवन बिताना था।
प्रश्न - 2. भिखारी बालकों की संगति में आदित्य क्या-क्या करता था?
उत्तर : आदित्य उनके साथ घूमता-फिरता, झूठी अमीरी की डींगें मारता, खाने-पीने और मौज-मस्ती में समय बिताता था।
प्रश्न - 3. दस रुपये चुराकर आदित्य ने उन्हें किस प्रकार खर्च किया?
उत्तर : उसने बर्फी खरीदी, सिनेमा देखा, मूँगफली खाई और दो अच्छे पेन खरीदे—एक अपने लिए और एक रामप्रसाद के लिए।
प्रश्न - 4. फिल्म देखते समय आदित्य को क्या डर सता रहा था?
उत्तर : उसे डर सता रहा था कि माँ बक्सा खोलेंगी और ताले में फँसी चाबी देखकर उसकी चोरी पकड़ी जाएगी और उसे मार पड़ेगी।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. आदित्य की माँ को कैसे पता चला कि आदित्य ने पैसे चुराए हैं?
उत्तर : जब माँ ने बक्सा खोलने का प्रयास किया तो चाबी नहीं मिली। ताले में फँसी चाबी देखकर संदेह हुआ। ताला खोलने पर बटुए से दस रुपये गायब मिले, जिससे उन्हें समझ आ गया कि यह काम आदित्य ने ही किया है।
प्रश्न - 2. आदित्य के पिता को स्कूल जाकर क्या पता चला?
उत्तर : स्कूल जाकर पिता को पता चला कि आदित्य दो महीने से स्कूल नहीं आ रहा था और उसका नाम स्कूल से काट दिया गया था।
प्रश्न - 3. घर जाने पर आदित्य के साथ क्या हुआ?
उत्तर : घर पहुँचते ही माँ ने क्रोधित होकर उसकी पिटाई की। मोहल्ले वाले इकट्ठा हो गए। बाद में माँ के साथ जाकर उसने छिपाए हुए बचे पैसे निकाले और भविष्य में चोरी न करने का वचन दिया। अगले दिन उसका नाम फिर से स्कूल में लिखवाया गया।