उत्तर : आदित्य का घर नगर के बाहर एक छोटे क्षेत्र में था।
प्रश्न - 2. आदित्य के पिता ने उसे कौन-सी कक्षा में प्रवेश दिलाया?
उत्तर : आदित्य के पिता ने उसे कक्षा छह में प्रवेश दिलाया।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. नए विद्यालय में प्रवेश लेने से पूर्व आदित्य किस प्रकार का विद्यार्थी था?
उत्तर : नए विद्यालय में प्रवेश लेने से पूर्व आदित्य एक होनहार विद्यार्थी था। वह कक्षा पाँच में सर्वाधिक अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ था और उससे उसके माता-पिता को बहुत आशाएँ थीं।
प्रश्न - 2. जिस क्षेत्र में आदित्य रहता था, वह किस प्रकार का था?
उत्तर : आदित्य जिस क्षेत्र में रहता था वह नगर के बाहर स्थित था। वहाँ लोगों का रहन-सहन अर्थशून्य था, अधिकांश लोग आधुनिकता में पिछड़े थे और बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं थे, यद्यपि कुछ घर आधुनिक जीवनशैली वाले भी थे।
प्रश्न - 3. आदित्य की कक्षा का वातावरण कैसा था?
उत्तर : आदित्य की कक्षा का वातावरण बहुत अव्यवस्थित और भीड़भाड़ वाला था। छात्रों की संख्या बहुत अधिक थी, बैठने की जगह नहीं थी, शोर-शराबा, मार-पीट और गुंडई होती रहती थी।
प्रश्न - 4. कक्षा में आदित्य को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर : आदित्य को कक्षा में बैठने की जगह नहीं मिलती थी, श्यामपट्ट ठीक से दिखाई नहीं देता था, पढ़ाई में व्यवधान रहता था और सहपाठी उसका उपहास करते थे। इन कारणों से वह पढ़ाई समझ नहीं पाता था।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. कक्षा की अव्यवस्था का आदित्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : कक्षा की अव्यवस्था का आदित्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। वह घबरा गया, पढ़ाई में पिछड़ गया और पंद्रह दिन बीत जाने पर भी उसे एक शब्द समझ में नहीं आया। उसके बड़े-बड़े सपने टूटने लगे और वह स्वयं को असहाय व निराश महसूस करने लगा। धीरे-धीरे उसका मन विद्यालय से उचट गया।
प्रश्न - 2. विद्यालय न जाकर आदित्य क्या करने लगा?
उत्तर : विद्यालय न जाकर आदित्य नगर की बरसाती नदी के किनारे आवारा बच्चों के साथ खेलने लगा। वह घर से बस्ता लेकर निकलता, इधर-उधर भटकता, वहीं दोपहर का भोजन करता और छुट्टी के समय घर लौट आता।
प्रश्न - 3. भिखारियों की बस्तियों में रहने वाले बालक किस प्रकार के थे?
उत्तर : भिखारियों की बस्तियों में रहने वाले बालक फिल्मी जीवनशैली से प्रभावित थे। वे फिल्में देखना, फिल्मी हीरो की तरह बाल रखना, कपड़े पहनना, संवाद बोलना और उसी शैली में जीवन जीना अपना गौरव समझते थे। धीरे-धीरे वे कुसंगति की ओर बढ़ते थे।