प्रश्न - 1. “सूरज चढ़ गया, अभी तक सुजान दूध लाया ही नहीं।”
उत्तर : कल्याणी ने
प्रश्न - 2. “अभी दूध नहीं आया?”
उत्तर : बलकरन ने
प्रश्न - 3. “तुरक आ गया, भागो, तुरक आ गया।”
उत्तर : एक हिंदू ग्रामीण ने
प्रश्न - 4. “यह भगदड़ कैसी मच रही है?”
उत्तर : कल्याणी ने
प्रश्न - 5. “बहिन चुप रहो, तुरक सुन लेगा।”
उत्तर : मुसलमान ग्रामीण ने
प्रश्न - 6. “इन तस्वीरों को पलटो, इनके पीछे दीवारों में कुछ होगा।”
उत्तर : मुबारक ने
प्रश्न - 7. “मैंने तुम्हें क्या हुक्म दिया था, सरदार?”
उत्तर : तैमूर ने
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. बलकरन देखने में कैसा था? पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर : बलकरन एक साधारण ग्रामीण बालक था, पर वह निडर, साहसी और आत्मसम्मानी था। उसकी उम्र केवल बारह वर्ष थी, फिर भी उसमें वीरता और समझदारी थी।
प्रश्न - 2. पाठ के आधार पर बताइए कि तैमूर देखने में कैसा था?
उत्तर : तैमूर रोबीले चेहरे वाला, ऊँची नाक, मोटे हाथों वाला, हाथ में तलवार लिए एक भयानक और कठोर योद्धा था।
प्रश्न - 3. गाँव में भगदड़ क्यों मच गई थी?
उत्तर : गाँव में भगदड़ इसलिए मच गई क्योंकि तैमूर अपनी बड़ी सेना के साथ लूट-पाट और आक्रमण करता हुआ गाँव की ओर आ रहा था।
प्रश्न - 4. गाँव में आकर तैमूर के सैनिक क्या करते थे?
उत्तर : तैमूर के सैनिक घरों की तलाशी लेते, सामान तोड़ते और सोना-चाँदी लूटने की कोशिश करते थे।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. जफर और मुबारक की बातचीत का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर : जफर और मुबारक गाँव में लूट की योजना पर बात करते हैं। मुबारक सैनिकों को सोना-चाँदी ढूँढने का आदेश देता है और कहता है कि ग्रामीण अपने धन को दीवारों और तस्वीरों के पीछे छिपाते हैं। उनका उद्देश्य लोगों को मारना नहीं बल्कि धन लूटना होता है।
प्रश्न - 2. बलकरन और तैमूर की बातचीत का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर : बलकरन निर्भीक होकर तैमूर से बात करता है और अपने दूध को देने से मना कर देता है। वह चाकू से लड़ने को तैयार हो जाता है। उसकी निडरता और साहस से तैमूर प्रभावित हो जाता है और उसकी जान बख्श देता है। तैमूर बलकरन की बहादुरी की प्रशंसा करता है और गाँव को नुकसान न पहुँचाने का वचन देता है।
प्रश्न - 3. बलकरन की वर्षगाँठ किस प्रकार मनाई गई? विस्तारपूर्वक बताइए।
उत्तर : बलकरन की वर्षगाँठ पर उसकी माँ कल्याणी ने उसे नहलाने, माला पहनाने और मिठाइयाँ व खीर खिलाने की योजना बनाई थी। हालाँकि तैमूर के आक्रमण से उत्सव बाधित हो गया, लेकिन बलकरन की बहादुरी के कारण न केवल उसकी जान बची बल्कि उसका गाँव भी सुरक्षित रहा। इस प्रकार उसकी वर्षगाँठ वीरता और साहस से यादगार बन गई।