प्रश्न - 1. समाचार-पत्र लोगों में सामान्यतया क्या संदेश पहुँचा रहे हैं?
उत्तर : समाचार-पत्र ठगी, भ्रष्टाचार, डकैती, चोरी आदि की घटनाएँ दिखाकर यह संदेश दे रहे हैं कि समाज में ईमानदारी समाप्त होती जा रही है और हर व्यक्ति संदेह के घेरे में है।
प्रश्न - 2. धर्म और कानून के विषय में लोगों के क्या विचार हैं?
उत्तर : लोग मानते हैं कि धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, पर कानून की कमियों का लाभ उठाकर उसे धोखा दिया जा सकता है।
प्रश्न - 3. लोगों का जीवन किस कारण कष्टकर हो जाता है?
उत्तर : केवल उन्हीं घटनाओं का हिसाब रखने से, जिनमें उन्हें धोखा मिला है, लोगों का जीवन कष्टकर हो जाता है।
प्रश्न - 4. भ्रष्टाचार आदि के विरुद्ध कानून बनाए जाते हैं। उनसे लोगों को प्रायः लाभ नहीं मिल पाता। क्यों?
उत्तर : क्योंकि कानून लागू करने वाले लोगों का मन हमेशा पवित्र नहीं होता और वे अपने स्वार्थ के कारण मूल लक्ष्य भूल जाते हैं।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. किस स्थिति के कारण जीवन के महान मूल्यों के बारे में लोगों की आस्था हिलने लगी है?
उत्तर : जब झूठ, फरेब और भ्रष्टाचार करने वाले फल-फूल रहे हैं और ईमानदार व मेहनती लोग पिस रहे हैं, तब सच्चाई और ईमानदारी को मूर्खता समझा जाने लगा है। इसी कारण महान मूल्यों में लोगों की आस्था डगमगा गई है।
प्रश्न - 2. जिन लोगों के लिए देश में कायदे-कानून बनाए जाते हैं, उनसे प्रायः वे लोग लाभान्वित नहीं हो पाते। क्यों?
उत्तर : क्योंकि योजनाओं को लागू करने वाले लोग अपने निजी स्वार्थों में उलझ जाते हैं और जनता के कल्याण के उद्देश्य को भूल जाते हैं।
प्रश्न - 3. भारत सदा कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है। इसका क्या अभिप्राय है?
उत्तर : इसका अर्थ है कि भारत में कानून को नैतिकता और कर्तव्य से जोड़ा गया है। यहाँ कानून केवल दंड का साधन नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म का प्रतीक माना गया है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. किन घटनाओं के आधार पर लेखक को लगा कि मनुष्यता अभी समाप्त नहीं हुई है?
उत्तर : लेखक को मनुष्यता के जीवित होने का विश्वास दो घटनाओं से हुआ—
पहली, टिकट बाबू द्वारा गलती से अधिक लिए गए पैसे ईमानदारी से लौटाना।
दूसरी, बस खराब होने पर कंडक्टर का दूसरी बस की व्यवस्था करना और बच्चों के लिए दूध-पानी लाना।
इन घटनाओं से लेखक को लगा कि दया, सच्चाई और ईमानदारी अब भी जीवित हैं।
प्रश्न - 2. ‘बुराई में रस लेना बुरी बात है, परंतु अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और भी बुरी बात है।’ क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : बुराइयों का प्रचार करने से समाज में निराशा फैलती है, लेकिन यदि अच्छाइयों को उजागर नहीं किया जाता तो लोगों में नैतिक मूल्यों के प्रति विश्वास कमजोर हो जाता है। अच्छाइयों के उदाहरण समाज को प्रेरणा देते हैं, इसलिए उन्हें सामने लाना अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न - 3. ‘धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है।’ इसका भावपूर्ण विवेचन कीजिए।
उत्तर : धर्म मनुष्य की अंतरात्मा से जुड़ा होता है, इसलिए उसे धोखा देना संभव नहीं है। कानून बाहरी व्यवस्था है, जिसमें नियमों की कमियों का लाभ उठाया जा सकता है। जब कानून को धर्म से अलग कर दिया जाता है, तब लोग नैतिकता छोड़कर केवल कानूनी बचाव खोजने लगते हैं, जिससे समाज में भ्रष्टाचार बढ़ता है।