उत्तर : गुवाहाटी को असम का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
प्रश्न - 2. असम के किन्हीं तीन प्रसिद्ध लेखकों के नाम लिखिए।
उत्तर : हेमचंद्र गोस्वामी, लक्ष्मीनाथ बैज बरुआ, चंद्रकुमार अग्रवाल।
प्रश्न - 3. ऐतिहासिक युग में असम की चर्चा किन सम्राटों के समय में आती है?
उत्तर : ऐतिहासिक युग में असम की चर्चा किन सम्राटों के समय में आती है?
प्रश्न - 4. असम के लोगों का खान-पान क्या है?
उत्तर : दाल-भात, मछली; साथ ही पान, सुपारी का अधिक प्रयोग।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. असम किस प्रकार की प्राकृतिक रचना से रचा-बसा प्रदेश है?
उत्तर : असम ऊँचे-नीचे पर्वतों, घने वनों, चौड़ी ब्रह्मपुत्र नदी, उपजाऊ मैदानों और प्रचुर वर्षा वाला प्राकृतिक प्रदेश है।
प्रश्न - 2. ह्वेनसांग ने असम की भूमि और जलवायु के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर : उसने लिखा कि असम की भूमि उर्वर है, जलवायु आर्द्र और उष्ण है, नदियाँ सदा बहती रहती हैं और लोग सरल व सच्चे हैं।
प्रश्न - 3. असमिया साहित्य का उदय कब से माना जाता है?
उत्तर : तेरहवीं सदी से, प्रेम सरस्वती की रचना प्रह्लाद चरित्र से।
प्रश्न - 4. असम के लोगों का पहनावा क्या है?
उत्तर : स्त्रियाँ मेखला-चादर और शाल पहनती हैं, पुरुष धोती और कंधों पर चादर ओढ़ते हैं।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. असम के नामकरण की पृष्ठभूमि का वर्णन कीजिए।
उत्तर : असम का प्राचीन नाम प्राग्ज्योतिष और कामरूप था। कालिदास ने इसे नीललोहित कहा। बाद में बर्मा की ओर से आई अहोम जाति ने लगभग छह सौ वर्षों तक शासन किया। ‘अहोम’ शब्द से ही ‘असम’ नाम बना। स्थानीय लोग आज भी इसे ‘अहोम’ उच्चारित करते हैं। भौगोलिक दृष्टि से ऊँचा-नीचा होने के कारण भी यह नाम उपयुक्त प्रतीत होता है।
प्रश्न - 2. असम में बिहू उत्सव का विशेष महत्त्व वर्णन कीजिए।
उत्तर : बिहू असम का प्रमुख और सांस्कृतिक उत्सव है। यह तीन प्रकार का होता है—
• रंगाली बिहू (बसंत व नववर्ष पर),
• भोगाली बिहू (फसल कटाई के बाद),
• कंगाली बिहू (अभाव के समय)।
इसमें नृत्य, संगीत, कीर्तन, गौ-सेवा और सामाजिक मेल-जोल होता है। यह जाति, धर्म से ऊपर उठकर असमिया एकता और कृषि संस्कृति का प्रतीक है।
प्रश्न - 3. स्वतंत्रता संग्राम में असमवासियों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर : 1857 के संग्राम में पीयली फूकन, मणिराम देवान और महेशचंद्र बरुआ ने अंग्रेजों का विरोध किया और बलिदान दिया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में तरुण राम फूकन, गोपीनाथ बरदलोई तथा कनकलता बरुआ जैसी वीरांगनाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। असमवासियों ने स्वतंत्रता के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया।