प्रश्न - 2. लेखक को कश्मीर यात्रा का निमंत्रण किस प्रकार मिला?
उत्तर : लेखक को एक फोन आया जिसमें उनसे पूछा गया— “नंदन जी, कश्मीर चलिएगा?” इसी तरह उन्हें निमंत्रण मिला।
प्रश्न - 3. महागुनस की चोटी की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर : लगभग साढ़े चौदह हजार फीट।
प्रश्न - 4. छड़ी मुबारक किसकी प्रतीक है?
उत्तर : श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर में प्रस्थापित शिवलिंग की प्रतीक, अर्थात अमरेश्वर शिव की प्रतीक।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. लेखक ने किस हादसे से होकर गुजरने की बात कही है?
उत्तर : महागुनस की चोटी से उतरते समय लेखक जिस टट्टू (घोड़े) पर सवार थे वह अचानक बिदककर दुलत्तियाँ झाड़ने लगा। नीचे हजारों फीट गहरी खाई थी, और लेखक की जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। यह मौत से साक्षात्कार जैसा हादसा था।
प्रश्न - 2. पतनीटॉप पर आकर लेखक को क्या अनुभव हुआ?
उत्तर : पतनीटॉप पहुँचकर लेखक को ठंडी और तरोताज़ा कर देने वाली हवा का झोंका महसूस हुआ, जिसने कश्मीर की सुहावनी जलवायु का संकेत दिया।
प्रश्न - 3. पहाड़ों पर उत्पन्न होने वाले कुछ वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर : पाइन (चीड़), चिनार, और अन्य पर्वतीय वृक्ष (पाठ में पाइन और चिनार विशेष रूप से उल्लेखित हैं)।
प्रश्न - 4. पहाड़ पर साँस लेने में तकलीफ क्यों होती है?
उत्तर : क्योंकि ऊँचाई बढ़ने पर ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है, जिससे साँस लेना कठिन हो जाता है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. चिनाव तथा लिद्दर नदी की कुछ प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर : चिनाव नदी पहाड़ों के बीच बहती हुई एक विशाल और प्रबल धारा है। लेखक ने इसे “भयंकर गति वाला, गंदला और उग्र प्रवाह” कहा है। यह कश्मीर घाटी को जोड़ने वाले मार्ग के किनारे बहती है और बरसात में इसका रूप और भी विकराल हो जाता है।
लिद्दर नदी को लेखक ने अत्यंत सुंदर, पारदर्शी और असाधारण कहा है। यह सफेद झाग वाली तेज बहाव वाली नदी है, जिसकी गर्जना और चंचलता पूरे पहलगाम को जीवंत बना देती है। लेखक के अनुसार उन्होंने इससे सुंदर नदी पहले कभी नहीं देखी।
प्रश्न - 2. नीलगंगा के साथ जुड़ी पौराणिक कथा का वर्णन कीजिए।
उत्तर : पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्री सदाशिव (भगवान शिव) काम-क्रीड़ा के प्रसंग में पार्वती जी से नेत्र-मिलन करते हुए अपने मुख पर अंजन का रंग लगा बैठे, जिससे उनका मुख काला हो गया। उन्होंने इसे नीलगंगा में धोया, जिससे नीलगंगा का जल भी काला हो गया। इस पवित्र जल के स्पर्श से महापापों का नाश होता है— ऐसा धार्मिक विश्वास है।
प्रश्न - 3. 'मेरा बैकुंठ का टिकट कैंसिल हो चुका था।' किस घटना के संदर्भ में यह कहा गया?
उत्तर : यह कथन लेखक ने उस समय कहा जब टट्टू बिदककर उन्हें खाई की ओर गिराने ही वाला था। ठीक उसी क्षण वे किसी तरह बच गए और नीचे खाई में नहीं गिरे। अर्थात, मृत्युसंकट से बच जाने पर उन्होंने मज़ाकिया ढंग से कहा कि बैकुंठ (मृत्यु के बाद जाने वाला लोक) का टिकट रद्द हो गया।
प्रश्न - 4. 'मेरी अमरनाथ यात्रा सफल होते-होते बची।' इससे क्या अभिप्राय है? सप्रसंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : यहाँ “सफल” शब्द का विशेष अर्थ है— तीर्थ पर जाते हुए मृत्यु हो जाना, जिसे कई श्रद्धालु पुण्य मानते हैं। लेखक जब टट्टू से गिरते-गिरते बचे और मौत से बाल-बाल बचे, तब उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा “सफल होते-होते बची”।
अर्थात, यदि वे गिरकर मर जाते, तो तीर्थयात्रा पर प्राण त्यागने के कारण लोग इसे “सफल यात्रा” मानते, परंतु वे बच गए— इसलिए उनकी “सफलता” टल गई। यह कथन एक प्रकार की व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण अभिव्यक्ति है।