प्रश्न - 1. सज्जन की तुलना सोने से क्यों की गई है?
उत्तर : क्योंकि सोना टूट-फूट जाने पर भी फिर से जुड़ जाता है, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति सौ बार टूटने पर भी पुनः संभल जाता है।
प्रश्न - 2. दुर्जन की तुलना घड़े से क्यों की गई है?
उत्तर : क्योंकि घड़ा कुम्हार के एक ही धक्के से फट जाता है, वैसे ही दुर्जन थोड़ी-सी चोट या बात से टूट जाता है।
प्रश्न - 3. बाँबी पर प्रहार करने वाले को कबीर ने बावला क्यों कहा है?
उत्तर : क्योंकि वह मूर्ख साँप को मारने के बजाय बाँबी को तोड़ रहा है, जिससे कोई लाभ नहीं होता। बाँबी किसी को नहीं डसती।
लघूत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न - 1. सोना, सज्जन और साधुजन के विषय में कबीर ने क्या कहा है?
उत्तर : कबीर कहते हैं कि सोना, सज्जन और साधुजन टूट कर भी बार-बार जुड़ जाते हैं। वे विपरीत परिस्थितियों में भी बिखरते नहीं बल्कि और अधिक चमकते हैं।
प्रश्न - 2. कबीर के अनुसार किस प्रकार की बोली बोलनी चाहिए?
उत्तर : ऐसी बोली जो “अमोल”, अर्थात मूल्यवान हो—
जो हृदय की तौल कर, सोच-समझकर बाहर आए और किसी को दुःख न पहुँचाए।
प्रश्न - 3. कबीर ने गुरु की तुलना किससे की है?
उत्तर : कबीर ने गुरु की तुलना कुम्हार से तथा शिष्य की तुलना घड़े (कुंभ) से की है।
प्रश्न - 4. कबीर ने मनुष्य जन्म कैसा बताया है?
उत्तर : कबीर ने मनुष्य जन्म को दुर्लभ बताया है जो बार-बार नहीं मिलता, जैसे पेड़ का पत्ता झड़ने के बाद पुनः डाली में नहीं लगता।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न -
प्रश्न - 1. कबीर ने मन को मूँडने की बात क्यों कही है? मन के विषय-विकार कैसे दूर हों?
उत्तर : कबीर कहते हैं कि लोग तो सिर के बाल अनेक बार मुंडाते हैं, परंतु मन के भीतर भरे विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार—को नहीं हटाते।
वे कहते हैं कि—
• बाहरी सफाई से कुछ नहीं होता,
• असली शुद्धि मन की है।
विकार दूर करने के उपाय (कबीर के अनुसार):
• सत्संग और सद्गुरु की शरण
• सत्य, प्रेम और करुणा का पालन
• सरल, संयमित जीवन
• अपने दोषों का चिंतन
• लोभ-मोह छोड़कर ईश्वर-स्मरण
इस प्रकार मन के विकार हटाकर ही मनुष्य सही मार्ग पर चलता है।
प्रश्न - 2. कबीर ने चक्की की उपयोगिता बताते हुए मूर्ति-पूजा का खंडन क्यों किया है?
उत्तर : कबीर कहते हैं कि यदि पत्थर की पूजा करने से भगवान मिलते, तो वे पहाड़ की पूजा करते।
परंतु भगवान पत्थर में नहीं मिलते। इसलिए वे निरर्थक मूर्ति-पूजा का विरोध करते हैं।
वे आगे कहते हैं कि पत्थर में बनी चक्की अधिक उपयोगी है, क्योंकि—
• चक्की संसार का पेट भरती है,
• अनाज पीसकर लोगों को भोजन देती है,
• जीवन में वास्तविक उपयोगिता रखती है।
कबीर का उद्देश्य यह बताना है कि—
• अंधविश्वास से दूर रहो,
• कर्म करो,
• ईश्वर को बाहरी पूजा नहीं,
• भक्ति, सेवा और सत्य से पाया जा सकता है।