Solutions For Class 8 Hindi


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Solutions For Class 8 Hindi 2025-26

Teacher Amrendra Singh Call @ 8967311377

अध्याय 12. एकलव्य

अति लघूत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न - 1. नारद मुनि ने एकलव्य को क्या सीख दी?

उत्तर : नारद मुनि ने उसे सलाह दी कि वह द्रोणाचार्य की मूर्ति बनाकर श्रद्धा और अभ्यास से धनुर्विद्या सीखे।

प्रश्न - 2. एकलव्य किस प्रकार धनुर्विद्या में निपुण हो सका?

उत्तर : एकलव्य ने जंगल में कुटिया बनाकर द्रोण की मूर्ति के सामने नियमित अभ्यास किया, जिससे वह धनुर्विद्या में निपुण हो गया।

प्रश्न - 3. एकलव्य ने कुत्ते का मुँह बाणों से क्यों सिल दिया?

उत्तर : कुत्ता लगातार भौंककर उसके अभ्यास में बाधा डाल रहा था, इसलिए उसने उसका मुँह बाणों से सिल दिया।

लघूत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न - 1. हिरण्यधनु क्यों चिंतित था?

उत्तर : हिरण्यधनु अपने पुत्र एकलव्य की शिक्षा को लेकर चिंतित था। उसे लगता था कि यदि एकलव्य धनुर्विद्या सीख ले तो वह भीलों का राज्य संभाल सकेगा और अपने शत्रुओं से छीना हुआ राज्य वापस ले सकेगा।

प्रश्न - 2. एकलव्य किससे धनुर्विद्या सीखना चाहता था?

उत्तर : एकलव्य आचार्य द्रोण से धनुर्विद्या सीखना चाहता था।

प्रश्न - 3. हिरण्यधनु का गुरु द्रोण के विषय में क्या विचार था?

उत्तर : हिरण्यधनु का विचार था कि आचार्य द्रोण ब्राह्मण हैं और भीलों को छूना भी नहीं चाहेंगे, इसलिए वे एकलव्य को शिक्षा नहीं देंगे।

प्रश्न - 4. धनुर्विद्या सिखाने की बात पर आचार्य द्रोण ने एकलव्य को क्या उत्तर दिया?

उत्तर : आचार्य द्रोण ने कहा कि वह शूद्र है और राजकुमारों के साथ अस्त्र-शस्त्र नहीं सीख सकता। इसलिए उन्होंने उसे शिक्षा देने से मना कर दिया और वहाँ से जाने के लिए कहा।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न -

प्रश्न - 1. गुरु द्रोण से मिलकर लौटते समय मार्ग में वृक्ष की छाया में बैठकर एकलव्य ने क्या अनुभव किया?

उत्तर : गुरु द्रोण द्वारा शिक्षा से वंचित करके लौटते समय रास्ते में एकलव्य बहुत दुखी था। वृक्ष की छाया में बैठकर उसने अनुभव किया कि उसे शूद्र होने के कारण ही शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। उसने सोचा कि वह और राजपुत्रों में क्या अंतर है। उसे लगा कि यदि गुरु जैसे ज्ञानी भी जाति का भेदभाव करते हैं तो उसके जैसे गरीब और वनवासी की विद्या कैसे पूरी होगी। उसे दुख था कि वह अपने पिता से वादा करके आया था और अब खाली हाथ लौटना पड़ेगा। वह बेहद निराश और दुखी था, तभी नारद मुनि वहाँ प्रकट हुए और उसे आशा का मार्ग दिखाया।

प्रश्न - 2. गुरु द्रोण द्वारा एकलव्य से उसके गुरु के विषय में पूछने पर एकलव्य ने क्या कहा?

उत्तर : एकलव्य ने विनम्रतापूर्वक कहा कि आचार्य द्रोण ही उसके गुरु हैं। उसने बताया कि नारद मुनि के कहने पर उसने द्रोण की एक मूर्ति बनाकर उसे गुरु मानकर प्रतिदिन श्रद्धा, भक्ति और परिश्रम से धनुर्विद्या का अभ्यास किया है। उसने कहा कि वह मूर्ति को प्रणाम कर अभ्यास करता है, इसलिए वह द्रोणाचार्य को ही अपना गुरु मानता है।

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