Solutions For Class 6 Hindi


St. John's Public School in Beliaghata, Kolkata, is a well-known educational institution that offers a blend of academic excellence and holistic development. call 9231828490.

Solutions For Class 6 Hindi 2025-26

Teacher Amrendra Singh Call @ 8967311377

अध्याय 11. उठो, दरवाजा खोल दो (एकांकी)

अति लघूत्तरीय प्रश्न- प्रश्न-बताइए, किसने कहा?

प्रश्न - 1. ओह! कितना अंधेरा बैठ गया है मेरे कमरे में।

उत्तर : प्रकाश ने

प्रश्न - 2. कुछ दार्शनिक मूड में लगते हैं।

उत्तर : किरण ने

प्रश्न - 3. जिस रोशनी की मुझे तलाश है, उसे बाहर से नहीं, भीतर से आना है।

उत्तर : प्रकाश ने

प्रश्न - 4. हर घुटन, त्रास और अंधकार को बाहर उलीचना होगा।

उत्तर : किरण ने

लघूत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न - 1. प्रकाश कमरे में बैठा क्या सोच रहा था?

उत्तर : प्रकाश कमरे में अंधेरे में बैठकर जीवन की निराशा, अकेलेपन, मनुष्य की स्वार्थमयी प्रवृत्तियों और घृणा-द्वेष से भरे वातावरण के बारे में सोच रहा था।

प्रश्न - 2. दरवाजे और खिड़कियाँ खुल जाने पर प्रकाश कैसा अनुभव करता है?

उत्तर : दरवाजे और खिड़कियाँ खुलने पर प्रकाश को बहुत प्रसन्नता और शांति का अनुभव होता है। उसे लगता है जैसे सारा अंधेरा मिट गया हो और रोशनी ने जीवन को भर दिया हो।

प्रश्न - 3. हमने अपने दामन में खुशियों के स्थान पर क्या भर लिया है?

उत्तर : हमने अपने दामन में खुशियों और फूलों के स्थान पर तोहमतें, घृणा, द्वेष और अलगाव की आग भर ली है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न -

प्रश्न - 1. लोग सुख किसे समझते हैं और उसे कहाँ खोजते हैं?

उत्तर : सामान्यतः लोग सुख को बाहरी वस्तुओं, वैभव, धन-दौलत और भौतिक साधनों में खोजते हैं। वे मानते हैं कि आराम, ऐश्वर्य और दिखावे से सुख प्राप्त होगा। परंतु वास्तविकता में इस सुख की तलाश करते-करते वे उलझनों, ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ की ओर बढ़ जाते हैं और सच्चा सुख खो बैठते हैं।

प्रश्न - 2. वास्तविक प्रकाशरूपी सुख किस प्रकार प्राप्त हो सकता है? समझाइए।

उत्तर : वास्तविक प्रकाशरूपी सुख भीतर से आता है। जब मनुष्य अपने अहंकार, ईर्ष्या और स्वार्थ जैसी प्रवृत्तियों को त्याग देता है, प्रेम, भाईचारे और समन्वय को अपनाता है, तभी जीवन में सच्चा सुख और शांति प्राप्त होती है। यह सुख न बाहर की वस्तुओं में है, न भौतिक साधनों में, बल्कि मनुष्य के हृदय की निर्मलता, मानवीयता और परस्पर स्नेह में है।

प्रश्न - 3. 'बंद दरवाजों को सबके लिए खोलना है।' इसका क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : इस कथन का अभिप्राय है कि हमें अपने मन और हृदय के संकीर्ण दरवाजों को खोलना होगा। नफरत, अलगाव, संप्रदायवाद, जातिवाद और स्वार्थ की दीवारों को तोड़कर भाईचारे, सद्भावना और प्रेम की रोशनी को भीतर आने देना होगा। तभी समाज से अंधेरा मिटेगा और जीवन में सच्चा उजाला आएगा।

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